रायपुर( सत्ताधीश/अनवर कुरैशी) छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए बिसात बिछ चुकी है। राज्य की सत्ताधारी भाजपा ने सबसे पहले प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की। खास बात ये है कि प्रत्याशी चयन में भाजपा ने एकदम सधे हुए कदम उठाए हैं। पार्टी ने पिछला चुनाव जीतने वाले 7 सांसदों की टिकट काट दी है और उनके स्थान पर नए चेहरों को जगह दी है। भाजपा की सूची जारी होने के बाद कांग्रेस ने पहली सूची में छह प्रत्याशियों की घोषणा की। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजनांदगांव सीट से प्रत्याशी बनाए गए हैं तो भाजपा ने सरकार के मंत्री और आठ बार विधानसभा जीतने वाले कद्दावर नेता बृजमोहन अग्रवाल को मैदान में उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। लोकसभा चुनाव में आंकड़ो के गणित के हिसाब से देखा जाए तो भाजपा का पलड़ा भारी नजर आता है। पिछले कई लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक-दो सीटें जीतती रही है। इस बार क्या कांग्रेस अपना पिछला रिकार्ड सुधार पाएगी, ये एक बड़ा सवाल है।
ये हैं मुकाबले के प्रत्याशी
भूपेश बघेल-राजनांदगांव
छत्तीसगढ़ में 2018 से लेकर 2023 तक पांच साल तक कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे भूपेश बघेल को पार्टी ने इस बार राजनांदगांव लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। इससे पहले वे 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में अपनी पंरपरागत पाटन सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे थे। श्री बघेल पूर्व में रायपुर लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उस समय उन्हें भाजपा के रमेश बैस के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार के बाद लोकसभा प्रत्याशी के रूप में श्री बघेल की यह नई शुरुआत है। वे पहली बार राजनांदगांव सीट से लड़ेंगे। वहां उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा सांसद संतोष पांडेय से होना तय माना जा रहा है। खास बात ये है कि विधानसभा चुनाव में राजनांदगांव जिले में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा था। इस आधार पर पहले ही माना जा रहा था कि यह सीट इस बार कांग्रेस के लिए अनुकूल हो सकती है, लेकिन पार्टी ने यहां से भूपेश बधेल को मैदान में उतारकर भाजपा के लिए कठिन चुनाैती पेश कर दी है।
कोरबा से ज्योत्सना महंत
कांग्रेस ने कोरबा से अपनी सांसद ज्योत्सना महंत पर एक बार फिर भरोसा जताया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में वे मोदी की लहर होने के बावजूद इस सीट से चुनाव जीतने में सफल रहीं थी। ज्योत्सना महंत वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ.चरणदास महंत की पत्नी है। माना जाता है कि कोरबा सहित आसपास के क्षेत्र की राजनीति में महंत परिवार का दबदबा कायम है। महंत परिवार के इसी प्रभाव के दम पर ज्योत्सना पर कांग्रेस ने एक बार फिर दांव लगाया है। उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय से होना तय है। सरोज पांडेय के लिए यह नया क्षेत्र है। इससे पहले वे दुर्ग लोकसभा से जीत चुकी हैं। लेकिन यह सीट उनकी पकड़ से दूर हो गई है। ये देखना दिलचस्प होगा कि कोरबा सीट पर वे कैसे मुकाबला कर पाती है। वे पूर्व के चुनाव में कोरबा की प्रभारी रह चुकी हैं।
जांजगीर से डॉ.शिवकुमार डहरिया
जांजगीर लोकसभा सीट से डॉ. शिव कुमार डहरिया को प्रत्याशी बनाया गया है। वे पिछली भूपेश सरकार में मंत्री रहे है। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में आरंग सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जांजगीर लोकसभा एससी के लिए आरक्षित सीट है। इस सीट पर कई अन्य दावेदार भी थे, लेकिन पार्टी ने सभी दावेदारियों को दरकिनार करते हुए डॉ.डहरिया पर दांव लगाया है। वे पूर्व में भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जांजगीर में उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी कमलेश जांगड़े से होना तय है। खास बात ये है कि भाजपा ने यहां से अपने माैजूदा सांसद की टिकट काटकर एक नए चेहरे को माैका दिया है।
दुर्ग से राजेंद्र साहू
दुर्ग लोकसभा सीट से कांग्रेस ने इस बार एक नए चेहरे के रूप में राजेंद्र साहू को प्रत्याशी बनाया है। श्री साहू दुर्ग में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष भी रहे हैं। खास बात ये है कि कांग्रेस की राजनीति में श्री साहू को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का करीबी माना जाता है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उन्हे जिला सहकारी बैंक का अध्यक्ष इस इरादे से बनाया गया था कि उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में दुर्ग से प्रत्याशी बनाया जाएगा। कांग्रेस की यह दूरगामी राजनीतिक सोच कारगर रही है। दुर्ग लोकसभा सीट पर कांग्रेस को 2019 के चुनाव में सबसे करारी हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में भाजपा के विजय बघेल ने कांग्रेस को शिकस्त दी थी। इस बार भी राजेंद्र साहू का मुकाबला विजय बघेल से होना तय है। विजय बघेल के खिलाफ कांग्रेस ने साहू समाज के प्रत्याशी को उतारकर जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है, इस सीट पर साहू समाज के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है, और वे राजनीतिक रूप से जागरूक माने जाते हैं।
रायपुर से विकास उपाध्याय
रायपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस ने विकास उपाध्याय को प्रत्याशी बनाया है। श्री उपाध्याय 2018 का विधानसभा चुनाव रायपुर पश्चिम सीट से भारी मतों से हारे थे। वे अखिल भारतीय कांग्रेस के सचिव एवं असम में प्रभारी सचिव भी रहे हैं। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस आलाकमान का उन पर भरोसा कायम है। खास बात ये है कि रायपुर लोकसभा एक ऐसी सीट है जहां दशकों से कांग्रेस को जीत नहीं मिली है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी रायपुर जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। 2024 के लोकसभा चुनाव में श्री उपाध्याय का मुकाबला भाजपा के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल से होना तय है। बृजमोहन अग्रवाल के लिए यह लोकसभा का पहला चुनाव है। इससे पहले आठ बार विधानसभा का चुनाव लगातार जीत चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी महंत राम सुंदर दास को 67 हजार से अधिक मतों से हराकर अपनी ताकत साबित की थी। राजनीतिक हल्कों में माना जा रहा है कि रायपुर लोकसभा से कांग्रेस के पास बृजमोहन के मुकाबले का कोई प्रत्याशी नहीं था, यही कारण है कि पार्टी ने विधानसभा चुनाव हारे प्रत्याशी पर दांव लगा दिया।
महासमुंद से ताम्रध्वज साहू
महासमुंद लोकसभा सीट से कांग्रेस ने ताम्रध्वज साहू को प्रत्याशी बनाया है। श्री साहू राज्य की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हैं। लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। श्री साहू पूर्व में दुर्ग लोकसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते हुए उन्हें महासमुंद जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया था। इस नाते उनका जुड़ाव महासमुंद सीट से रहा है। लेकिन खास बात ये है कि यह संसदीय क्षेत्र ओबीसी में साहू बाहुल्य माना जाता है। इस सीट से भाजपा ने रूप कुमारी चौधरी से होना तय है। लेकिन रूपकुमारी ओबीसी में अन्य समुदाय से आती है। यही कारण हो सकता है कि कांग्रेस ने साहू प्रत्याशी के रूप में ताम्रध्वज का नाम तय किया है। कांग्रेस को इसी वजह से यहां जीत की संभावना नजर आती है।
इन पांच सीटों पर नाम तय होना बाकी
कांग्रेस ने पांच सीटों पर नाम तय किए हैं लेकिन अभी छह सीटों पर प्रत्याशी तय होना बाकी है। इनमें प्रमुख सीट बस्तर की है जहां से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज 2019 में जीते थे, अभी भी यहां से उनकी दावेदारी है। बची सीटों में रायगढ़,सरगुजा, कांकेर,बिलासपुर शामिल हैं।



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